Saturday, October 31, 2020

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती

 


भारत के उप प्रधान मंत्री 

कार्यकाल :15 अगस्त 1947 – 15 दिसम्बर 1950

प्रधानमंत्री : जवाहरलाल नेहरु

                    गृह मंत्रालय

पद बहाल : 15 अगस्त 1947 – 15 दिसम्बर 1950

प्रधानमंत्री  : जवाहरलाल नेहरु

जन्म : 31 अक्टूबर 1875
नडियाद, बंबई प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत

मृत्यु : 15 दिसम्बर 1950 (उम्र 75)
बॉम्बे, बॉम्बे राज्य, भारत

राष्ट्रीयता :भारतीय

राजनीतिक दल : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

बच्चे : मणिबेन पटेल, दह्याभाई पटेल

शैक्षिक सम्बद्धता : मिडल टेम्पल

पेशा : वकालत, राजनीति

सम्मान : भारत रत्न 

सरदार वल्लभ भाई पटेल समान व्यक्ति नहीं थे उनमें एक देश हित को लेकर ग़ज़ब की जोश थी यही कारण है कि उन्होंने आजादी के बाद कई रियासतों को एक किया l
सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर अर्थात् उनके जन्म दिवस के अवसर पर विश्व एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। देश की आजादी में सरदार पटेल का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। 562 देशी रियासतों का भारत में विलय सरदार पटेल ने ही करवाया था। अटल निश्चय से ओत प्रोत सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर जानिए उनके ऐसे विचारों को जो किसी की भी जिंदगी में और समाज के परिदृश्य में बदलाव ला सकते हैं। हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी गुजरात में statue of unity अर्थात पटेल जी की विशालकाय मूर्ति की स्थापना कर पटेल जी को श्रद्धांजलि देने की प्रयास किए हैं l इसे पर्यटन स्थल के उद्देश्य से भी विकसित किया जा रहा है l भविष्य में य़ह आय का साधन बन सकता है l

                            राजनीति दुनिया 

ये भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। वे एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता थे, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और एक एकीकृत, स्वतंत्र राष्ट्र में अपने एकीकरण का मार्गदर्शन किया। भारत और अन्य जगहों पर, उन्हें अक्सर सरदार कहा जाता हैं l जिसका अर्थ है "प्रमुख"। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण और 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। इन्होंने गृहमंत्री होते हुए बखूबी अपनी कर्तव्य का पालन सदा निष्ठा के साथ किया l इन्होंने देश के कई मुद्दों को बड़ी सहजता के साथ समाधान किया जिसके लिए देश आज भी इन्हें बड़े सम्मान के साथ याद करता है ll

               संघर्ष एवं साहित्य जीवन :

सरदार पटेल जी की जीवन से लोगों को प्रेरणा मिलती है उनका जीवन के अध्ययन से पता चलता है हमे जीवन के संघर्षों से डर कर भगाना नहीं चाहिए ll
निरन्तर संघर्षपूर्ण जीवन जीने वाले सरदार पटेल को स्वतंत्र रूप से पुस्तक-रचना का अवकाश नहीं मिला, परंतु उनके लिखे पत्रों, टिप्पणियों एवं उनके द्वारा दिये गये व्याख्यानों के रूप में बृहद् साहित्य उपलब्ध है, जिनका संकलन विविध रूपाकारों में प्रकाशित होते रहा है। इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण तो सरदार पटेल के वे पत्र हैं जो स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में दस्तावेज का महत्व रखते हैं। 1945 से 1950 ई० की समयावधि के इन पत्रों का सर्वप्रथम दुर्गा दास के संपादन में (अंग्रेजी में) नवजीवन प्रकाशन मंदिर से 10 खंडों में प्रकाशन हुआ था। इस बृहद् संकलन में से चुने हुए पत्र-व्यवहारों का वी० शंकर के संपादन में दो खंडों में भी प्रकाशन हुआ, जिनका हिंदी अनुवाद भी प्रकाशित किया गया। इन संकलनों में केवल सरदार पटेल के पत्र न होकर उन-उन संदर्भों में उन्हें लिखे गये अन्य व्यक्तियों के महत्वपूर्ण पत्र भी संकलित हैं। विभिन्न विषयों पर केंद्रित उनके विविध रूपेण लिखित साहित्य को संकलित कर अनेक पुस्तकें भी तैयार की गयी हैं। उनके समग्र उपलब्ध साहित्य का विवरण इस प्रकार है:-

हिन्दी में
सरदार पटेल : चुना हुआ पत्र-व्यवहार (1945-1950) - दो खंडों में, संपादक- वी० शंकर, प्रथम संस्करण-1976, [नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
सरदारश्री के विशिष्ट और अनोखे पत्र (1918-1950) - दो खंडों में, संपादक- गणेश मा० नांदुरकर, प्रथम संस्करण-1981 [वितरक- नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद]
भारत विभाजन (प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली)
गांधी, नेहरू, सुभाष (" ")
आर्थिक एवं विदेश नीति (" ")
मुसलमान और शरणार्थी (" ")
कश्मीर और हैदराबाद (" ")

              इनका सम्मान भारत का सम्मान 

पटेल जी  के सम्मान में देश हमेशा कुछ ऐसा किया है जो देशहित में हो ll योग्य नेता का समुचित सम्मान देने में कहीं चूक न जाए इसका ख्याल यहां की सरकार की है l इसलिए 
अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नामकरण सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र रखा गया है।
गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय
सन १९९१ में मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
मुख्य लेख: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
इसकी ऊँचाई 240 मीटर है, जिसमें 58 मीटर का आधार है। मूर्ति की ऊँचाई 182 मीटर है, जो स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊँची है। 31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक नए स्मारक का शिलान्यास किया। यहाँ लौह से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा लगाने का निश्चय किया गया, अतः इस स्मारक का नाम 'एकता की मूर्ति' (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया है। प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप 'साधू बेट' पर स्थापित किया गया है जो केवाडिया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है।

2018 में तैयार इस प्रतिमा को प्रधानमंत्री मोदी जी ने 31 अक्टूबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया। यह प्रतिमा 5 वर्षों में लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। जो दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है l
इसकी ऊँचाई 182 मीटर ( 597 फिट) है जबकि आधार सहित 240 मीटर ( 790 फिट) है l

                      STAUE OF UNITY 








Saturday, October 24, 2020

दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है.?

                      दुर्गा            पूजा                               


प्रचलित नाम :दुर्गा पूजा

अन्य नाम :अकाल बोधन

अनुयायी :हिन्दू

प्रकार:हिन्दू

समापन :अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को


आवृत्ति : वार्षिक

समान पर्व : महालय, नवरात्रि, दशहरा




 दुर्गा पूजा हिन्दुओं का पवित्र त्योहारों में से एक धूम - धाम से मनाया जाने वाला पर्व हैं l जैसा कि हम सब जानते हैं हर त्योहार मनाने के पूछे कई लोक कथाएं, वैज्ञानिक कारण के साथ साथ धार्मिक आस्था भी हैं l 


आइये जानते हैं आखिर दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है?


हिन्दू धर्म के मान्यता अनुसार युगों पूर्व एक महा असुर जिसका नाम महिषासुर था, वो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में उत्पात मचा रखा था l पृथ्वी वासी के साथ साथ देवता गण भी महिषासुर के अत्याचार से त्राहि माम - त्राहि माम कर रहे थे l

 इंद्र और अन्य देवता भी महिषासुर को परास्त करने के लिए कई बार घमासान युद्ध किए परंतु हर बार देवता सहित इंद्र भी स्वयं परास्त हो गए l सभी देवताओं को पृथ्वी पर विचरण करना पर रहा था l सभी देवता और इंद्र भी इस समस्या की निदान के लिए एक एक कर ब्रह्मा विष्णु  जी के पास गए l इसी समय त्रिमूर्ति अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश अत्यधिक क्रोध से भर गए तत्पश्चात इनके मुख से एक तेज प्रकट हुआ और अन्य देवताओं के शरीर से एक तेजोमय शक्ति मिलकर एक एकाकार विशाल पहाड़ सा बन गया l

और इसी से उत्पति हुई माता दुर्गा की l इन्होंने महिषासुर का वध किया जिसके कारण आज भी दुनिया इन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से पुकारती हैं l


देवी की उत्पति से देवता काफी प्रसन्न हुए l  उन्हें विश्वाश था अब महिषासुर का वध निश्चित है l शिव जी अपना त्रिशूल देकर देवी का स्वागत और महिषासुर को वध करने को कहें तथा देवी उत्पति की उद्देश्य से भी अवगत करवाया l भगवान विष्णु भी चक्र देवी को प्रदान किया l इसी तरह सभी देवताओं ने अस्त्र - शस्त्र देकर देवी को युद्ध के लिए सुसज्जित किया l


तत्पश्चात आरम्भ हुआ महिषासुर के साथ युद्ध l य़ह युद्ध महिषासुर, करोड़ों असुर और माता दुर्गा के साथ दस दिनों तक घमासान युद्ध हुआ l इन दस दिनों में देवी ने दस रूप धारण किए l 

नौ रूप : 

शैलपुत्री

ब्रह्मचारिणी

चंद्रघंटा

कूष्माण्डा

स्कंदमाता

कात्यायनी

कालरात्रि

महागौरी

और अंत में देवी ने दस हाथों वाली रूप यानी माता दुर्गा का रूप धारण कर महिषासुर का वध कर दिया l य़ह विजय दस दिनों में मिली जिस कारण इसे विजयादशमी भी कहा जाता है l और माता को महिषासुर मर्दिनी l और इसी दिन से हर साल दुर्गा पूजा मनाया जाता है l य़ह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतीक है और समाज को य़ह सुस्पष्ट संदेश देती है कि बुराई या अधर्म चाहें जितना शक्तिशाली हो उसका पतन निश्चित है l


कौन था महिषासुर.          :-


महिषासुर का जन्म


महिषासुर एक असुर था। महिषासुर के पिता रंभ, असुरों का राजा था जो एक बार जल में रहने वाले एक भैंस से प्रेम कर बैठा और इन्हीं के योग से महिषासुर का आगमन हुआ। इस वजह से वश महिषासुर इच्छानुसार जब चाहे भैंस और जब चाहे मनुष्य का रूप धारण कर सकता था।


हिन्दू पुराणों के अनुसार - एक समय में राक्षस राज महिषासुर हुआ करता था, जो बहुत ही शक्तिशाली था| स्वर्ग पर आधिपत्य ज़माने के लिए उसने ब्रह्म देव की घोर तपस्या की| जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और महिषासुर से वर मांगने को कहा| राक्षस राज ने अमरता का वर माँगा परंतु ब्रह्मा ने इसे देने से इंकार कर इसके बदले महिषासुर को स्त्री के हाथों मृत्यु प्राप्ति का वरदान दिया| महिषासुर प्रसन्न होकर सोचा मुझ जैसे बलशाली को भला कोई साधारण स्त्री कैसे मार पायेगी?


यहि कारण है कि महिषासुर का वध देवी के ही हाथों हुआ ll


 पतझड़ (शरतकाल) के समय दुर्गा की पूजा बंगाल में सबसे बड़ा हिन्दू पर्व है। दुर्गा पूजा नेपाल और भूटान में भी स्थानीय परम्पराओं और विविधताओं के अनुसार मनाया जाता है। पूजा का अर्थ "आराधना" है और दुर्गा पूजा बंगाली पंचांग के छटे माह अश्विन में बढ़ते चन्द्रमा की छटी तिथि से मनाया जाता है। तथापि कभी-कभी, सौर माह में चन्द्र चक्र के आपेक्षिक परिवर्तन के कारण इसके बाद वले माह कार्तिक में भी मनाया जाता है। ग्रेगोरी कैलेण्डर में इससे सम्बंधित तिथियाँ सितम्बर और अक्टूबर माह में आती हैं। साल 2018 मे देश की सबसे महंगी दुर्गा पूजा कोलकाता में हुई, जँहा पद्मावत की थीम पर बना 15 करोड़ का पंडाल लगाया गया था l


रामायण में राम, रावण से युद्ध के दौरान देवी दुर्गा को आह्वान करते हैं। यद्यपि उन्हें पारम्परिक रूप से वसन्त के समय पूजा जाता था। युद्ध की आकस्मिकता के कारण, राम ने देवी दुर्गा का शीतकाल में अकाल बोधन आह्वान किया।


आइये आप और हम संकल्प ले कि पूरी कोशिश करेंगे कि अच्छाइयों और सत्य का साथ दे l और अपनी जीत सुनिश्चित करे l चाहें वो जिंदगी की मैदान हो या अपनी सपनों में पंख लगाने की बात दृढ़ निश्चय होकर कठिन परिश्रम कर और सत्य का साथ देकर अपनी जीत पक्की करे ll




Thursday, October 8, 2020

राम विलास पासवान का हुआ निधन

                                राम विलास पासवान                    


जीवन परिचय

राम विलास पासवान जी राजनीति क्षेत्र में एक बड़े चेहरा और कद्दावर नेता थे l हम सबको दुःख है कि एक ईमानदार नेता नहीं रहे l दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीत ने का रिकॉर्ड बनाया l
आइये जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी बाते और उनके सद्गुणों को अपनाए और जीवन में आगे बढ़ना सीखे l उनका जीवन हम सबके लिए शिक्षाप्रद और सीखने योग्य हैं l

परिचय
रामविलास पासवान भारतीय दलित राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी हैं। वे सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। रामविलास पासवान जी का आज 8 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में निधन हो गया है। उनका 
जन्म: 5 जुलाई 1946 (आयु 74 वर्ष), खगडिया
पूर्ण नाम: Ram Vilas Paswan
दल: लोक जनशक्ति पार्टी
पति/पत्नी: रीना पासवान (विवाह . 1983), राजकुमारी देवी (विवा. –1981)
बच्‍चे: चिराग पासवान, आशा पासवान, उषा पासवान
पिछले कार्य काल: लोक सभा सांसद (2014–2019), लोक सभा सांसद (1989–2014), ज़्यादा

एक कहावत है " ना कहू से दोस्ती, ना कहू से बैर इस कहावत को अपने जीवन रामविलास पासवान जी बखूबी चरितार्थ कर के दिखाया और समाज में मिलजुलकर रहने का संदेश दिया l
पासवान जी प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं। 1996 से 2015 तक केन्द्र में सरकार बनाने वाले सभी राष्ट्रीय गठबंधन चाहे यूपीए हो या एनडीए, का वह हिस्सा बने। इसी कारण लालू प्रसाद ने उनको ‘मौसम विज्ञानी’ का नाम दिया था। अब तो वह खुद भी स्वीकारते हैं कि वह जहां रहते हैं सरकार उन्हीं की बनती है।  मतलब राजीतिक मौसम का पुर्वानुमान लगाने में वे माहिर हैं। वे समाजवादी पृष्ठभूमि के बड़े नेताओं में एक हैं।  देशभर में उनकी पहचान राष्ट्रीय नेता के रूप में है। हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते हैं, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

बड़े फैसले 

’ हाजीपुर में रेलवे का जोनल कार्यालय खुलवाए 
’ केन्द्र में अंबेडकर जयं ती पर छुट्टी घोषित कराई 
केन्द्रीय मंत्री 

1989 में पहली बार केन्द्रीय श्रम मंत्री 
1996 में रेल मंत्री 
1999 में संचार मंत्री 
2002 में कोयला मंत्री 
2014 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री 
2019 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री

कुछ खाशियत 


रामविलास जी छात्र जीवन में पुलिस बनना चाहते थे उनको प्रशासनिक क्षेत्र में जाने को अभिरूचि थी l उन्होंने यूपीएससी का Exam भी दिए थे लेकिन कहते हैं वही होता है जो मंज़ूरे खुदा होता है किस्मत भी उन्हें राजनीति में ले आयी फिर उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा l 
उन्होंने कोसी कॉलेज खगड़िया और पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली। वह नॉनवेज पसंद करते हैं। मछली उनकी पहली पसंद है।

उपभोक्ता मामलात मंत्री, भारत सरकार
              पदस्थ           

           कार्यालय ग्रहण 
26 मई 2015, पुनः 30 मई 2019

प्रधानमंत्री :नरेन्द्र मोदी. 

 केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री 

       कार्यकाल.   

         2004 - 2009.      

प्रधानमंत्री:मनमोहन सिंह.   

         केन्द्रीय खनिज मंत्री.   

         कार्यकाल. 
          2001 - 2002.   

प्रधानमंत्री :अटल बिहारी वाजपेयी

 केन्द्रीय सूचना एवं प्रचारण मंत्री
           कार्यकाल. 
            1999 - 2000  

          प्रधानमंत्री 
    अटल बिहारी वाजपेयी.                 

          भारत के रेलमंत्री.        
               कार्यकाल.   
           1996 - 1998.        

हाजीपुर से सांसद.        

रामविलास पासवान भारतीय दलित राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक हैं।वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी हैं।[2] वे सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। रामविलास पासवान का 8 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में निधन हो गया।

रामविलास पासवान

Thursday, September 17, 2020

नरेंद्र दामोदर दास मोदी : भारत के प्रधान मंत्री

भारत के 15वें प्रधानमन्त्री

          पदस्थ

     कार्यालय ग्रहण 
      26 मई 2014

 राष्ट्रपति: राम नाथ कोविंद


सांसद, लोकसभा
पदस्थ
कार्यालय ग्रहण :16 मई 2014
पूर्वा धिकारी
मुरली मनोहर जोशी
चुनाव-क्षेत्र
वाराणसी
गुजरात के १४वें मुख्यमन्त्री
पद बहाल
7 अक्टूबर 2001 – 22 मई 2014
राज्यपाल
सुन्दर सिंह भण्डारी
कैलाशपति मिश्र

जन्म :17 सितम्बर 1950 (आयु 69)
वड़नगर, गुजरात, भारत

जन्म का नाम: नरेन्द्र दामोदरदास मोदी

राष्ट्रीयता : भारतीय

राजनीतिक दल :भारतीय जनता पार्टी

जीवन संगी : जसोदाबेन चिमनलाल

शैक्षिक सम्बद्धता : दिल्ली विश्वविद्यालय
गुजरात विश्वविद्यालय

धर्म : हिन्दू


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जन्म: 17 सितम्बर 1950) 26 मई 2014 से अब तक लगातार दूसरी बार वे भारत के प्रधानमन्त्री बने हैं तथा वाराणसी से लोकसभा सांसद भी चुने गये हैं।[2][3] वे भारत के प्रधानमन्त्री पद पर आसीन होने वाले स्वतंत्र भारत में जन्मे प्रथम व्यक्ति हैं। इससे पहले वे 7 अक्तूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मोदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं।

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विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त नरेन्द्र मोदी विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं और वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं॥ माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर भी वे सबसे ज्यादा फॉलोअर (4.5करोड़+, जनवरी 2019) वाले भारतीय नेता हैं। उन्हें 'नमो' नाम से भी जाना जाता है। टाइम पत्रिका ने मोदी को पर्सन ऑफ़ द ईयर 2013 के 42 उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है।

अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेन्द्र मोदी एक राजनेता और कवि हैं। वे गुजराती भाषा के अलावा हिन्दी में भी देशप्रेम से ओतप्रोत कविताएँ लिखते

वडनगर के एक गुजराती परिवार में पैदा हुए, मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की, और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया। आठ साल की उम्र में वे आरएसएस से जुड़े, जिसके साथ एक लंबे समय तक सम्बंधित रहे। स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने घर छोड़ दिया। मोदी ने दो साल तक भारत भर में यात्रा की, और कई धार्मिक केन्द्रों का दौरा किया। 1969 या 1970 वे गुजरात लौटे और अहमदाबाद चले गए। 1971 में वह आरएसएस के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए।। 1985 में वे बीजेपी से जुड़े और 2001 तक पार्टी पदानुक्रम के भीतर कई पदों पर कार्य किया, जहाँ से वे धीरे धीरे भाजपा में सचिव के पद पर पहुँचे।

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नरेन्द्र मोदी का २६ मई २०१४ से भारत के १५वें प्रधानमन्त्री का कार्यकाल राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित शपथ ग्रहण के पश्चात प्रारम्भ हुआ। मोदी के साथ ४५ अन्य मन्त्रियों ने भी समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली।प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सहित कुल ४६ में से ३६ मन्त्रियों ने हिन्दी में जबकि १० ने अंग्रेज़ी में शपथ ग्रहण की। समारोह में विभिन्न राज्यों और राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों सहित सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया।इस घटना को भारतीय राजनीति की राजनयिक कूटनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।




Sunday, August 16, 2020

महेंद्र सिंह धोनी : एक महान क्रिकेटर के साथ एक बेहतर इंसान

जन्म: 7 जुलाई 1981 (आयु 39 वर्ष), राँची 

ऊंचाई: 1.75 मी

पिता : पान सिंह 

माता : देवकी देवी 

वज़न: 70 kg

पत्नी: साक्षी धोनी (विवाह :2010) 

 टीम: चेन्नई सुपर किंग्स (विकेट कीपर)


महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से 15 अगस्त 2020 को संन्यास ले लिया। 🙏



✌️महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखण्ड के रांची में एक मध्यम वर्गीय राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम पान सिंह व माता श्रीमती देवकी देवीहै उनके पैतृ जहां उनके पिताजी श्री पान सिंह मेकोन कंपनी के जूनियर मैनेजमेंट वर्ग में काम करने लगे। धोनी की माता श्रीमती देवकी देवी एक साधारण गृहिणी थीं। धोनी की एक बहन है जिनका नाम है जयंती और एक भाई है जिनका नाम नरेन्द्र है। धोनी का बडा भाई नरेंद्रसिंह राजनीति में कार्यरत है और उनकी बहन जयंती गुप्ता एक शिक्षिका है। पहले धोनी के बाल लम्बे हुआ करते थे जो अब उन्होंने कटवा दिए हैं कारण वे अपने पसंदीदा बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम जैसे दिखना चाहते थे। धोनी एडम गिलक्रिस्ट के प्रशंसक है और बचपन से ही उनके प्रसंशक है lउनके क्रिकेट सहयोगी सचिन तेंदुलकर बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन और गायिका लता मंगेशकर है।


धोनी द ए वी जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली (वर्त्तमान में जे वी एम , श्यामली, रांची के नाम से जाने जाते है) में पढ़ते थे। धोनी को बैडमिंटन और फुटबॉल इन दोनों खेलों मे विशेष रुचि थी। इंटर-स्कूल प्रतियोगिता में, धोनी ने इन दोनों खेलों में स्कूल का प्रतिनिधित्व किया था जहां उन्होंने बैडमिंटन व फुटबॉल में अपना अच्छा प्रदर्शन दिखाया जिस कारण वे जिला व क्लब लेवल में चुने गए थे। धोनी अपने फुटबॉल टीम के गोलकीपर भी रहे चुके हैं। उन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट खेलने के लिए उनके फुटबॉल कोच ने भेजा था। हालांकि उसने कभी क्रिकेट नहीं खेला था, फ़िर भी धोनी ने अपने विकेट-कीपिंग के कौशल से सबको प्रभावित किया और कमांडो क्रिकेट क्लब के (१९९५—१९९८) में नियमित विकेटकीपर बने। क्रिकेट क्लब में उनके अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें १९९७/९८ सीज़न के वीनू मांकड़ ट्राफी अंडर सिक्सटीन चैंपियनशिप में चुने गए जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। दसवीं कक्षा के बाद ही धोनी ने क्रिकेट की ओर विशेष ध्यान दिया और बाद में वे एक अच्छे क्रिकेटर बनकर उभरे।


✌️ व्यक्तिगत जानकारी


उपनाम :माही,एमएसडी ,एमएस ,कैप्टन कूल 

कद : 1.7 मीटर 

बल्लेबाजी की शैली :दाएं हाथ से गेंदबाजी 

भूमिका :विकेट-कीपर ,बल्लेबाज

अंतर्राष्ट्रीय:राष्ट्रीय पक्ष, भारत

टेस्ट में पदार्पण : (कैप 251)

2 दिसम्बर 2004 बनाम श्रीलंका

अंतिम टेस्ट : 26 दिसम्बर 2014 बनाम ऑस्ट्रेलिया

वनडे पदार्पण (कैप 158) : 3 दिसम्बर 2004 बनाम बांग्लादेश

अंतिम एक दिवसीय : 17 जुलाई 2018 बनाम इंग्लैंड


टी20ई पदार्पण (कैप 2) : 1 दिसम्बर 2006 बनाम दक्षिण अफ्रीका

अंतिम टी ट्वेंटी : 22 दिसम्बर 2017 बनाम श्री लंका

घरेलू टीम की जानकारी :-


 वर्ष : 1999/00–2003/04

बिहार :2004/05–वर्तमान

झारखंड : 2008–2015

चेन्नई सुपर किंग्स (शर्ट नंबर 7)

2016–2017

राइजिंग पुणे सुपरजायंट (शर्ट नंबर 7)

2018-वर्तमान

चेन्नई सुपर किंग्स

कैरियर के आँकड़े

प्रतियोगिता टेस्ट वनडे टी२० अं टी२०

मैच 90 341 98 302

रन बनाये 4,876 10,500 1,617 6205

औसत बल्लेबाजी 38.09 50.72 37.60 38.54

शतक/अर्धशतक 6/33 10/71 0/2 0/24

उच्च स्कोर 224 183* 56 84*

गेंद किया 96 36 12

विकेट 0 1 0

औसत गेंदबाजी 31.00

एक पारी में ५ विकेट 0 0 0

मैच में १० विकेट 0 0

श्रेष्ठ गेंदबाजी 1/14

कैच/स्टम्प 256/38 314/120 159/78 364/57

स्रोत : ईएसपीएन क्रिकइन्फो, 10 मार्च 2019

धोनी ने कई सम्मान भी प्राप्त किए हैं जैसे २००८ में आईसीसी वनडे प्लेयर ऑफ़ द इयर अवार्ड (प्रथम भारतीय खिलाड़ी जिन्हें ये सम्मान मिला), राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार और २००९ में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री पुरस्कार साथ ही २००९ में विस्डन के सर्वप्रथम ड्रीम टेस्ट ग्यारह टीम में धोनी को कप्तान का दर्जा दिया गया। उनकी कप्तानी में भारत ने २८ साल बाद एक दिवसीय क्रिकेट विश्व कप में दुबारा जीत हासिल की। सन् २०१३ में इनकी कप्तानी में भारत पहली बार चैम्पियंस ट्रॉफी का विजेता बना। धोनी दुनिया के पहले ऐसे कप्तान बन गये जिनके पास आईसीसी के सभी कप है। इन्होंने २०१४ में टेस्ट क्रिकेट को कप्तानी के साथ अलविदा कह दिया था। इनके इस फैसले से क्रिकेट जगत स्तब्ध रह गया। 14 जुलाई 2018 को, एमएस धोनी चौथे भारतीय क्रिकेटर और ओडीआई क्रिकेट में 10,000 रन बनाने के लिए दूसरे विकेटकीपर बने।




धोनी लगातार दूसरी बार क्रिकेट विश्व कप में २०१५ क्रिकेट विश्व कप में भारत का नेतृत्व किया और पहली बार भारत ने सभी ग्रुप मैच जीते साथ ही इन्होंने लगातार ११ विश्व कप में मैच जीतकर नया रिकार्ड भी बनाया ये भारत के पहले ऐसे कप्तान बने जिन्होंने १०० वनडे मैच जिताए हो। और उन्होनें कहा है कि जल्द ही वो एक ऐसा कदम उठाएंगे जो किसी कप्तान ने अपने कैरियर में नहीं उठाया वो टीम को २ हिस्सों में बाटेंगे जो खिलाड़ी अच्छा नहीं खेलेगा उसे वो दूसरी टीम में डाल देंगे और जो खिलाड़ी अच्छा खेलेगा वो उसे अपनी टीम में रख लेंगे इसमें कुछ नये खिलाड़ी भी आ सकते हैं। धोनी ने ४ जनवरी २०१७ को भारतीय एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और ट्वेन्टी-२० अंतरराष्ट्रीय टीम की कप्तानी छोड़ी।


 धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया आईसीसी वर्ल्ड टी-20 (2007), क्रिकेट वर्ल्ड कप (2011) और आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी (2013) का खिताब जीत चुकी है. इसके अलावा भारत 2009 में पहली बार टेस्ट में नंबर-1 बना था.


कप्तान धोनी की उपलब्धियां


1 क्रिकेट वर्ल्ड कप (2011)


1 टी-20 वर्ल्ड कप (2007)


1 चैम्पियंस ट्रॉफी (2013)


3 आईपीएल खिताब (2010, 2011, 2018)


2 चैम्पियंस लीग टी-20 खिताब (2010, 2014)


अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन


10,773 वनडे रन, विकेट के पीछे 444 शिकार


4,876 टेस्ट रन, विकेट के पीछे 294 शिकार


1,617 टी-20 इंटरनेशनल रन, विकेट के पीछे 91 शिकार


वनडे इंटरनेशनल में प्रदर्शन


महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 350 वनडे मैचों में 50.57 की औसत से 10773 रन बनाए हैं, जिसमें 10 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 183 रन रहा. वनडे में धोनी के नाम 1 विकेट है और उनका बेस्ट प्रदर्शन 14 रन देकर 1 विकेट रहा है.


टेस्ट मैचों में प्रदर्शन


महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 90 टेस्ट मैचों में 38.09 की औसत से 4876 रन बनाए हैं, जिसमें 6 शतक और 33 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 224 रन रहा.


टी-20 इंटरनेशनल में प्रदर्शन


महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 98 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 37.60 की औसत से 1617 रन बनाए हैं, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 56 रन रहा.


आईपीएल में प्रदर्शन


महेंद्र सिंह धोनी ने 190 आईपीएल मैचों में 42.21 की औसत से 4432 रन बनाए हैं, जिसमें 23 अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 84 रन रहा.


इंटरनेशनल क्रिकेट सफर


भारत में जहां क्रिकेटरों को शीर्ष स्तर तक पहुंचने में जीवन लगा देना होता है, वहीं धोनी की प्रतिभा कुछ अलग ही थी. जूनियर क्रिकेट से बिहार क्रिकेट टीम, झारखंड क्रिकेट टीम से इंडिया ए टीम तक और वहां से भारतीय टीम तक का उनका सफर महज 5-6 साल में पूरा हो गया. उन्होंने 1998 में जूनियर क्रिकेट की शुरुआत की थी और 23 दिसंबर 2004 में उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैच के जरिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज कर दिया.


धोनी बांग्लादेश के खिलाफ अपनी पहली सीरीज में कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन अगली सीरीज में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पांचवें वनडे मैच में विशाखापत्तनम में 123 गेंदों पर 148 रनों की पारी खेलकर इस खिलाड़ी ने सबकी जुबां पर एक सवाल छोड़ दिया, 'वो लंबे बालों वाला लड़का, धोनी कौन है?'


महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय टीम की कप्तानी साल 2008 में संभाली थी. जब धोनी ने टीम की कप्तानी संभाली तो उनके पास कई चुनौतियां थीं. जैसे की युवाओं को मौका देना और भविष्य के लिए टीम का निर्माण करना. धोनी ने उन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक पल दिए. भारत ने धोनी की कप्तानी में पहली बार टेस्ट में नंबर एक बनने का स्वाद चखा.


धोनी की कप्तानी में भारत आईसीसी वर्ल्ड टी-20 (2007), क्रिकेट वर्ल्ड कप (2011) और आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी (2013) का खिताब जीत चुका है. इसके अलावा भारत 2009 में पहली बार टेस्ट में नंबर एक बना था. दिसंबर 2014 में धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास की घोषणा कर दी थी. धोनी ने साल 2017 की शुरुआत में ही वनडे और टी20 कप्तानी को भी उसी अंदाज में अलविदा कहा, जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

Saturday, August 15, 2020

कारगिल शहीदों की अमर गाथा : डॉ. हरिओम पवार

डॉ. हरिओम पंवार की कविता : कारगिल 


युद्ध के शहीदों की अमर गाथा… मै केशव का पाञ्चजन्य हूँ, 

गहन मौन मे खोया हूं, उन बेटो की याद कहानी लिखते-लिखते रोया हूं l 

जिन माथे की कंकुम बिंदी वापस लौट नहीं पाई चुटकी,

 झुमके पायल ले गई कुर्वानी की अमराई l

कुछ बहनों की राखी जल गई है बर्फीली घाटी में, 

वेदी के गठबंघन मिल गये हैं सीमा की माटी मेंl

 पर्वत पर कितने सिंदूरी सपने दफन हुए होंगे बीस बसंतों के मधुमासी जीवनहरण हुए होंगे


.टूटी चूडी, धुला महावर, रूठा कंगन हाथों का कोई मोल नहीं दे सकता बासंती जज्बातों का

 जो पहले-पहले चुम्बन के बादलाम पर चला गया नई दुल्हन की सेज छोडकर युद्ध काम पर चला गया l

उसको भी मीठी नीदों की करवट याद रही होगी खुशबू में डूबी यादों की सलवट याद रही होगी, 

उन आखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं जब मेंहदी वाले हाथों ने मंगलसूत्र उतारे हैंl

 गीली मेंहदी रोई होगी छुप के घर के कोने में, 

ताजा काजल छूटा होगा चुपके चुपके रोने में l

 जब बेटे की अर्थी आई होगी सूने आंगन में.. शायद दूध उतर आया हो बूढी मां के दामन में ll

वो विधवा पूरी दुनिया का बोझा सर ले सकती है, जो अपने पती की अर्थी को भी कंधा दे सकती है मै ऐसी हर देवी के चरणो मे शीश झुकाता हूं, इसिलिये मे कविता को हथियार बना कर गाता हूं l

जो सैनिक सीमा रेखा पर ध्रुव तारा बन जाता है, उस कुर्बानी के दीपक से सूरज भी शरमाता है गरम दहानो पर तोपो के जो सीने आ जाते है, उनकी गाथा लिखने को अम्बर छोटे पड जाते है उनके लिये हिमालय कंधा देने को झुक जाता है कुछ पल को सागर की लहरो का गर्जन रुक जाता है उस सैनिक के शव का दर्शन तीरथ जैसा होता है, चित्र शहीदो का मंदिर की मूरत जैसा होता है जिन बेटो ने पर्वत काटे है अपने नाखूनो से, उनकी कोई मांग नही है दिल्ली के कानूनो से सेना मर-मर कर पाती है, दिल्ली सब खो देती है….. और शहीदों के लौहू को, स्याही से धो देती है…… मैं इस कायर राजनीति से बचपन से घबराता हूँ….. इसीलिए मैं कविता को हथियार बनाकर गाता हूँ।।


 – डॉक्टर हरिओम पंवार (कवि)


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Wednesday, August 12, 2020

राहत इंदौरी गीतकार और शायर

 राहत इन्दौरी (उर्दू: ڈاکٹر راحت اندوری) (जन्म: 1 जनवरी 1950-11 अगस्त 2020 ) एक भारतीय उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के गीतकार थे थे।[1] वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रह चुके हैं। उनकी मृत्यु 11 अगस्त 2020 को हुई।[2]




वास्तविक नाम : राहत कुरैशी

जन्म : 1 जनवरी 1950 (आयु 70)
इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत
मृत्यु : 11 अगस्त 2020 (उम्र 70) दिल का दौरा
इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत
व्यवसाय : उर्दू शायर, गीतकार
राष्ट्रीयता : भारतीय
नागरिकता : भारतीय
शिक्षा: स्नातकोत्तर, पी. एचडी.
विधा :गज़ल, नज़्म, गीत
जीवनसाथी : सीमा
सन्तान :शिबली, फैसल, सतलज

शुरुआती दौर
राहत इंदोरी जी ने शुरुवाती दौर में इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में उर्दू साहित्य का अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। उनके छात्रों के मुताबिक वह कॉलेज के अच्छे व्याख्याता थे। फिर बीच में वो मुशायरों में व्यस्त हो गए और पूरे भारत से और विदेशों से निमंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया। उनकी अनमोल क्षमता, कड़ी लगन और शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली थी ,जिसने बहुत जल्दी व बहुत अच्छी तरह से जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। राहत साहेब ने बहुत जल्दी ही लोगों के दिलों में अपने लिए एक खास जगह बना लिया और तीन से चार साल के भीतर ही उनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक प्रसिद्ध शायर बना दिया था। वह न सिर्फ पढ़ाई में प्रवीण थे बल्कि वो खेलकूद में भी प्रवीण थे,वे स्कूल और कॉलेज स्तर पर फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान भी थे। वह केवल 19 वर्ष के थे जब उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में अपनी पहली शायरी सुनाई थी।

शिक्षा

राहत का जन्म इंदौर में 1 जनवरी 1950 में कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के यहाँ हुआ। वे उन दोनों की चौथी संतान हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की[3] और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया।[4] तत्पश्चात 1985 में मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
राहत जी की दो बड़ी बहनें थीं जिनके नाम तहज़ीब और तक़रीब थे,एक बड़े भाई अकील और फिर एक छोटे भाई आदिल रहे। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी और राहत जी को शुरुआती दिनों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने अपने ही शहर में एक साइन-चित्रकार के रूप में 10 साल से भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। चित्रकारी उनकी रुचि के क्षेत्रों में से एक थी और बहुत जल्द ही बहुत नाम अर्जित किया था। वह कुछ ही समय में इंदौर के व्यस्ततम साइनबोर्ड चित्रकार बन गए। क्योंकि उनकी प्रतिभा, असाधारण डिज़ाइन कौशल, शानदार रंग भावना और कल्पना की है कि और इसलिए वह प्रसिद्ध भी हैं। यह भी एक दौर था कि ग्राहकों को राहत द्वारा चित्रित बोर्डों को पाने के लिए महीनों का इंतजार करना भी स्वीकार था। यहाँ की दुकानों के लिए किया गया पेंट कई साइनबोर्ड्स पर इंदौर में आज भी देखा जा सकता है।उनका निधन 11 अगसत 2020 को दिल का दौरा(हार्ट अटैक)आने की वजह से हुआ ।



डेली करेंट अफेयर्स 2022 (Daily Current Affairs 20 JUNE 2022) : IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWER FOR PREPRATION OF GOVERMENTp JOB

 डेली करेंट अफेयर्स 2022 (Daily Current Affairs 20 JUNE 2022) : IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWER FOR PREPRATION OF GOVERMENT दोस्तों जैसा की ...